आरक्षण विवाद में इंजीनियरिंग की 64% सीटें रह गई खाली:फार्मेसी की 41% और पॉलिटेक्निक की 78% सीटों पर भी नहीं हो पाया एडमिशन

छत्तीसगढ़ में पिछले दो महीने से चल रहे आरक्षण विवाद का प्रोफेशनल कॉलेजों के दाखिले में बड़ा असर नजर आने लगा है। कुछ कोर्स तो ऐसे हैं, जिनमें इस वजह से पूरा सेशन ही विवाद की भेंट चढ़ गया है। भास्कर की पड़ताल के मुताबिक आरक्षण विवाद के कारण प्रदेशभर में इंजीनियरिंग की 7 हजार से ज्यादा यानी 64 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान पॉलिटेक्निक कालेजों को हुआ है। इनमें 8224 सीटें हैं लेकिन इनमें से 1771 (मात्र 22%) सीटों पर ही एडमिशन हो पाया है, 78 फीसदी सीटें खाली हैं।

बी फार्मेसी व डी फार्मेसी की काउंसिलिंग शुरू हुई है लेकिन इस कोर्स की भी 41 प्रतिशत सीटें खाली रह गई हैं। कोर्ट के आदेश से ही बीएड, डीएलएड व बीएससी एग्रीकल्चर जैसे कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई। एग्रीकल्चर व डीएलएड की काउंसिलिंग पहले ही खत्म हो गई। बीएड के लिए मंगलवार, 10 जनवरी को आखिरी दिन था। इस कोर्स में 14400 सीटें हैं। 14200 सीटों में दाखिले होने की खबर है। कॉलेज से संख्या अपडेट की जा रही है।इस तरह से लगभग सभी कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया शिक्षा सत्र 2022-23 के अनुसार खत्म हो गई। इसी सत्र को लेकर भास्कर की पड़ताल में पता चला कि पिछली बार इंजीनियरिंग कॉलेजों में 43 फीसदी दाखिले हुए थे। उस वक्त प्रवेश परीक्षा देने वाले छात्रों की संख्या सीटों के अनुपात में करीब-करीब बराबर थी। जबकि इस बार 11494 सीटों के लिए साढ़े 12 हजार छात्रों ने प्रवेश परीक्षा दी थी। इसमें से 4192 छात्रों ने दाखिला लिया। लेकिन 7302 सीटें खाली रह गई।

कोर्ट का आदेश हुआ, तब फार्मेसी दाखिले के लिए मिले 4 दिन

चालू शिक्षा सत्र 2022-23 में बी फार्मेसी व डी फार्मेसी में 59 फीसदी सीटों पर एडमिशन हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ में दोनों कोर्स की 6238 सीटें हैं। व्यापमं से हुई इनकी प्रवेश परीक्षा में इस बार 22 हजार से अधिक छात्र शामिल हुए थे। माना जा रहा था कि पिछली बार की तरह ही इस बार भी फार्मेसी की ज्यादातर सीटें भर जाएंगी।लेकिन फार्मेसी कॉलेजों की मान्यता की वजह से सितंबर में काउंसिलिंग शुरू नहीं हो पाई। इसके बाद आरक्षण को लेकर विवाद शुरू हुआ और काउंसिलिंग फिर रुक गई। बाद में कोर्ट ने एडमिशन के आदेश दिए, तब काउंसिलिंग शुरू हो पाई, लेकिन तब एडमिशन की निर्धारित तिथि के केवल चार ही दिन बचे थे।इसमें केवल 3675 सीटों पर एडमिशन हो पाए, 2567 सीटें खाली रह गईं। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से फार्मेसी में रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख 31 दिसंबर तय की गई थी। यह तारीख बीत चुकी है। इसलिए फार्मेसी की दोबारा काउंसिलिंग शुरू होने की संभावना कम ही है।

इंजीनियरिंग काउंसिलिंग नहीं रुकती तो 10 फीसदी सीटें और भर जातीं

इंजीनियरिंग की काउंसिलिंग को आरक्षण विवाद के कारण रोकना पड़ा। अगर ऐसा नहीं होता तो अब तक 10 प्रतिशत सीटें और भर सकती थीं। इसी तरह, पॉलीटेक्निक में भी पिछली बार की तुलना में करीब 20 फीसदी कम दाखिले हुए हैं।इसकी 8224 सीटों के लिए 11796 उम्मीदवारों ने प्रवेश परीक्षा दी थी। इसमें से 1771 सीटों पर ही दाखिले हुए, जबकि 6453 (78.46 %) खाली रह गई। दरअसल, ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) की ओर से तकनीकी कोर्स में प्रवेश कोर्स में प्रवेश की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर तय की गई थी। लेकिन प्रदेश में उस वक्त आरक्षण को लेकर विवाद शुरू हो गया था।

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