सीमा पर सुरक्षा को लेकर BSF आजकल लगातार स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। यह तकनीक मेक इन इंडिया के तहत बनाई गई है। पाकिस्तान के तरफ से आने वाले खतरनाक ड्रोन को मार गिराने में भी स्वदेशी तकतीक का उपयोग किया जा रहा है। इसकी जानकारी BSF डीजी पंकज सिंह के तरफ से दी गई। उन्होंने सीमा पार से आ रहे ड्रोन को एक बड़ी चुनौती बताया है।
डीजी बोले- आसमान से आने वाला खतरा एक बड़ा मुद्दा
डीजी पंकज सिंह ने बताया- आसमान से आने वाला यह नया खतरा एक बड़ा मुद्दा है। हालांकि हमने सीमा पर एंटी ड्रोन टेक्निक स्थापित की है, लेकिन हमारे पास ऐसा मेगा सेटअप नहीं है जो पूरे पश्चिमी क्षेत्र को कवर करता हो। इस दिशा में हम कई भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। आने वाले दिनों में हम इस नई तकनीक को कई और संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात कर सकते हैं।
BSF ने ऐसे ड्रोन भी विकसित किए हैं जो सटीकता के साथ आंसू गैस के गोले छोड़ सकते हैं। डीजी ने कहा- टेकनपुर में हमारी टीयर गैस यूनिट ने इस प्रकार के ड्रोन विकसित किए हैं जो न केवल एक बार में 5 से 6 आंसू गैस के गोले ले जा सकते हैं बल्कि इन गोलों को सटीकता से टारगेट पर भी गिरा सकते हैं। वैसे, अभी यह तकनीक केवल विकसित की गई है और इसे अमल में नहीं लाया गया है।
2022 में 16 ड्रोन मार गिराए
BSF के मुताबिक इस साल अब तक 16 ड्रोन को मार गिराया गया है। इनमें ज्यादातर चीन के और फैब्रिकेटेड हैं। पंकज सिंह ने बताया- ड्रोन में इनबिल्ट चिप्स हैं, इसलिए हम कुछ मामलों में डेटा को पुनः प्राप्त करने में सक्षम हैं। डीजी के मुताबिक BSF अब अधिक से अधिक स्वदेशी तकनीकों का ऑप्शन चुन रहा है, क्योंकि निगरानी के लिए इस्तेमाल की जा रही विदेशी तकनीक बहुत महंगी थी।उन्होंने बताया- BSF ने अपनी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया है। हमने अपनी टीम की मदद से कम लागत वाले टेक्नोलॉजी सिस्टम डेवलप किए हैं। डीजी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे के लिए 30 करोड़ रुपए की मंजूरी दी हैं। हम अपनी सीमाओं पर 5500 कैमरे लगाने जा रहे हैं।






