हर महीने की पहली तारीख में पैसे से जुड़े कई नियम बदल जाते हैं। इस बार भी 1 जून 2025 से आपकी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई अहम चीजों में बदलाव होने जा रहा है। यह बदलाव सीधे तौर पर आपकी जब सर्विस और फाइनेंशियल प्लानिंग पर असर करते हैं। गैस सिलेंडर की कीमत से लेकर बैंकिंग और टैक्स सिस्टम तक बहुत कुछ नया लागू होगा। आइए जानते हैं कि 1 जून से किन-किन नियमों में बदलाव होने वाला है। 1 जून से लागू होने वाले यह बदलाव आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल सकते हैं। ऐसे में समय रहते अपने फाइनेंशियल प्लान को अपडेट करें और जरूरी सर्विस के बारे में जानकारी ले ताकि किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
सरकार 1 जून से ईपीएफओ का नया वर्जन 3.0 लॉन्च कर सकती है। इसके जरिए पीएफ से जुड़ी सर्विस जैसे पैसा निकालना, क्लेम करना या डिटेल अपडेट करना पहले से ज्यादा आसान हो जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि एटीएम जैसे कार्ड से सीधे पीएफ अकाउंट से पैसे निकाले जा सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड होल्डर के लिए कुछ सख्त नियम लागू हो सकते हैं। अगर आपका ऑटो डेबिट फेल होता है, तो 2% तक का पेनल्टी चार्ज देना पड़ सकता है। इसके अलावा यूटिलिटी बिल या फ्यूल के लिए कार्ड इस्तेमाल करने पर एक्स्ट्रा चार्ज लग सकता है। इंटरनेशनल लेनदेन पर भी अतिरिक्त शुल्क और रीवार्ड प्वाइंट्स में कटौती संभव है।
1 जून से एटीएम से पैसे निकालने पर लगने वाला चार्ज भी बढ़ सकता है। अब सीमित फ्री ट्रांजैक्शन के बाद प्रति ट्रांजेक्शन ज्यादा पैसे कट सकते हैं। इसलिए एटीएम इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी जरूरी होगी।
हर महीने की पहली तारीख को एलपीजी सिलेंडर की कीमतें तय होती है ऐसे में 1 जून को गैस सिलेंडर महंगा या सस्ता हो सकता है। इसका सीधा असर आपके घरेलू बजट पर पड़ेगा, खासकर उन परिवारों पर जो सब्सिडी वाले सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं।
अगले महीने 6 जून को आरबीआई की बैठक होनी है। ऐसी उम्मीद है की बैठक में आरबीआई रेपो रेट कम कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो बैंक एफडी पर ब्याज दरे घटा सकते हैं। अभी हाल में एसबीआई एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस जैसे बैंकों ने एफ़डी पर ब्याज घटाया था। अगर आरबीआई रेपो रेट घटना है। तो बैंक फिर एचडी पर इंटरेस्ट घटा सकते हैं।
GSTN मैं एक अहम बदलाव की जानकारी दी है। 1 जून से इनवॉइस नंबर अब केस-इनसेंसेटिव (अप्परकेस या लावरकेस में फर्क नहीं माना जाएगा) नहीं रहेंगे। यानी abc,ABC या Abc तीनों एक ही माने जाएंगे। इससे डुप्लीकेट में वायरस नंबर जनरेट होने की दिक्कत खत्म होगी। साथ ही इन वायरस नंबर अपने आप बड़े अक्षरों (UPPERCASE) में बदल दिए जाएंगे।






