वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को 2 घंटे तक सुनवाई हुई। इस कानून के खिलाफ 70 से ज्यादा याचिाकाए लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर केंद्र से जवाब मांगा है। केंद्र को दो हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करना है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून के विरोध में देश भर में हो रही हिंसा पर चिंता भी जताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वक्फ बोर्ड में गैर मुसलमानों को शामिल करने के समर्थन में केंद्र द्वारा पेश की गई उसे दलील पर भी कड़ा संज्ञान लिया है कि इस तर्क के अनुसार, हिंदू जजों की बेंच को वक्फ से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई नहीं कर करनी चाहिए। प्रधान न्यायाधीश (CJI)संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन की बेंच वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के उन प्रावधानों पर सवाल कर रही थी जो केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति की अनुमति देते हैं।
चीफ जस्टिस ने कहा,”क्या आप यह सुझाव दे रहे हैं कि मुसलमानों सहित अल्पसंख्यकों को भी हिंदू धार्मिक संस्थाओं का प्रबंध करने वाले बोर्ड में शामिल किया जाना चाहिए? कृपया इसे खुलकर बताइए।” मामले में केंद्र का प्रतिनिधित्व करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रावधानों का बचाव करते हुए जोर दिया कि गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना सीमित है और इन निकायों की मुख्य रूप से मुस्लिम संरचना को प्रभावित नहीं करता है। मेहता ने यहां भी कहा कि गैर मुस्लिम भागीदारी पर आपत्ति तार्किक रूप से न्यायिक निष्पक्षता तक विस्तारित हो सकती है और उसे तर्क से, बेंच स्वयं मामले की सुनवाई करने से “अयोग्य” हो जाएगी।
मेहता ने कहा कि यदि वैधानिक बोर्ड में गैर मुसलमानों की उपस्थिति पर आपत्ति स्वीकार कर ली जाती है, तो वर्तमान बेंच भी मामले की सुनवाई नहीं कर पाएगी। उन्होंने कहा, “तब यदि हम उसे तर्क के अनुसार चलते हैं, तो माननीय (मौजूदा बेंच के न्यायाधीश) इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकते।” इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “नहीं, माफ कीजिए मिस्टर मेहता, हम केवल न्याय निर्णय के बारे में बात नहीं कर रहे हैं। जब हम यहां बैठते हैं, तो हम किसी धर्म के मानने वाले नहीं रह जाते हैं। हम पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है। हमारे लिए, एक पक्ष या दूसरा पक्ष समान है।”
वहीं, आपको बता दे कि वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज लगातार दूसरे दिन सुनवाई जारी रहेगी। आज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट अंतिम आदेश जारी कर सकता है। वक्फ संपत्तियों को डी-नोटिफाई करने, कलेक्टर की जांच के दौरान नए प्रावधान लागू ना करने और वक्फ बोर्ड के साथ काउंसिल में गैर-मुसलमानों की एंट्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ये अंतरिम आदेश पारित करेगा।






